“तोहार प्रेम के छाँव बसंत के पेड़ के नीचे मिलेला, जाड़ा के पेड़ के नीचे भी तोहार ही छाँव मिलेला”
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Bhojpuri Shayari
“तोहार प्रेम के छाँव बसंत के पेड़ के नीचे मिलेला, जाड़ा के पेड़ के नीचे भी तोहार ही छाँव मिलेला”
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