जो बड़ेन को लघु कहैं, नहिं रहीम घटि जाहिं। गिरिधर मुरलीधर कहें, कछु दुख मानत नाहिं॥
Top 75 Rahim Quotes
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कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही सांचे मीत॥
रहिमन गली है सांकरी, दूजो नाहिं ठहराय। आपु चलै तो ठौर है, दूजा चलै तो नाय॥
रहिमन अपने पेट कूं, बहुत कह्यो समुझाय। जो तू अनखाये रहै, तौ तू ही जात बलाय॥
रहिमन मीठे वचन ते, सुख उपजत चहुं ओर। बसीकरन इक मंत्र है, तज दे वचन कठोर॥
रहिमन प्रेम-प्रीति को, बिरवा चलौ लगाय। सींचन की सुधि लीजियो, मुरझि न कुम्हिलाय॥
रहिमन यों सुख होत है, बढ़त देखि निज गोत। ज्यों बड़री अंखियां निरखि, आंखिन को सुख होत॥
रहिमन निज संपति बिना, कोउ न बिपति सहाय। बिनु पानी ज्यों जलज को, नहिं रवि सके बचाय॥
रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय॥
खैर, खून, खांसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान। रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥
