जड़ चेतन गुन दोषमय, बिस्व कीन्ह करतार। संत हंस गुन गहहिं पय, परिहरि बारि बिकार॥
Top 40 Tulsidas Quotes
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बंदउँ संत समान चित, हित अनहित नहिं कोइ। अंजलि गत सुभ सुमन जिमि, सम सुगंध कर दोइ॥
बिनु पद चलै सुनै बिनु काना। कर बिनु करम करै बिधि नाना॥
मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥
तुलसी संत सुअंब तरु, फूलि फलहिं पर हेत। इत ते वे पाहन हनत, उत ते वे फल देत॥
भक्ति हीन नर सोहइ कैसा। बिनु जल बारिद देखिअ जैसा॥
आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी॥
संत असंतन्हि कै असि करनी। जिमि कुठार चंदन आचरनी॥
बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥
सकल सुमंगल दायक, रघुनायक गुन गान। सादर सुनहिं ते तरहीं, भव सिंधु बिना जलजान॥
